सूडान: युद्ध के 1000 दिन और शांति की तलाश
Sudan War: 1000 Days of Conflict and the Search for Peace | Analysis by Ravi Kumar Manjhi 1000 दिनों से अधिक समय से सूडान में बंदूकें बोल रही हैं और इस शोर में एक पूरे समाज की आवाज़ दब गई है। 15 अप्रैल 2023 को शुरू हुआ यह संघर्ष अब केवल सैन्य टकराव नहीं रह गया , बल्कि एक ऐसी मानवीय त्रासदी बन चुका है जिसमें हजारों जानें जा चुकी हैं और लाखों लोग अपने ही देश में विस्थापित हो चुके हैं। ऐसे समय में युद्धविराम की मांग सिर्फ एक राजनीतिक अपील नहीं , बल्कि एक थके हुए समाज की ज़रूरत बन चुकी है। संकट की जड़ें सूडान की मौजूदा स्थिति को समझने के लिये उसके अतीत पर नज़र डालनी होगी। तीन दशकों तक चला दमनकारी शासन , जिसने सत्ता बनाए रखने के लिये हिंसा और विभाजन को हथियार बनाया , देश को भीतर से कमजोर कर चुका था। दारफुर और नूबा पर्वत जैसे क्षेत्रों में हुई घटनाएँ इस विभाजन की गहराई को दिखाती हैं। 2019 में जब जनता सड़कों पर उतरी और उमर अल-बशीर की सत्ता का अंत हुआ , तब एक नई शुरुआत की उम्मीद जगी थी। लाखों लोग एक साथ खड़े हुए यह केवल विरोध नहीं , बल्कि बदलाव की सामूहिक आकांक्षा थी लेकिन यही उम्मीद जल्...